प्रदेश में विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार को आधार बनाकर कांग्रेस में किए गए हालिया बदलाव के बाद प्रदेश कांग्रेस में असंतोष खुलकर फूटने लगा है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष व चकराता से विधायक प्रीतम सिंह ने हार के कारणों के लिए गुटबाजी और इसमें उनकी भूमिका को जिम्मेदार ठहराने के लिए राष्ट्रीय महामंत्री संगठन केसी वेणुगोपाल व प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव को निशाने पर लिया। प्रीतम ने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व को इसकी जांच करानी चाहिए और यदि मुझ पर गुटबाजी करने की बात साबित होती है तो मैं तत्काल अपनी विधायकी से इस्तीफा दे दूंगा। यमुना कालोनी स्थित अपने सरकारी आवास में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रीतम गुटबाजी के आरोपों से बेहद नाराज नजर आए। उन्होंने कहा कि मुझ पर शीर्ष नेताओं का आरोप सरासर गलत है।

इसी बीच देर शाम प्रीतम सिंह ने सीएम पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात करके कईं तरह की चर्चाओं को जन्म दिया। हालाकि प्रीतम सिंह व उनके करीबियों ने कहा की यह मुलाकात राज्य की बेहतरी को लेकर हुई लेकिन ये मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब इससे ठीक पहले कांग्रेस आला कमान ने प्रदेश अध्यक्ष, नेता और उपनेता प्रतिपक्ष के नामों का एलान कर दिया। सियासी पंडितों का मानना है कि पार्टी में अपनी रुसवाई से नाराज़ प्रीतम अपने और अपने करीबियों के लिए सियासी विकल्प तलाश रहे हैं। बता दें कि चकराता सीट से लगातार पांच बार विधायक होने के अलावा सिंह 2017 से 2021 तक पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं।